उत्तराखंड के सभी जिलों में उद्यमिता और ग्रामीण विकास के लिए बैंकिंग सहयोग मजबूत करने का लक्ष्य

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य की वित्तीय प्रगति का खाका खींचते हुए मुख्यमंत्री ने बैंकों को अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और निवेश की रीढ़ बताया। उन्होंने बैंक अधिकारियों और प्रतिनिधियों को सख्त हिदायत दी कि प्रदेश में ऋण जमा अनुपात को तत्काल बढ़ाया जाए। सीएम धामी ने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ कुछ मामूली दस्तावेजों (डॉक्यूमेंट) की त्रुटियों या कमियों की वजह से पात्र लाभार्थियों को कल्याणकारी योजनाओं के लाभ और लोन से वंचित न किया जाए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के पर्वतीय जिलों में बैंकिंग सेवाओं की सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी गढ़वाल में मानक से कम ऋण-जमा अनुपात होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन सभी पिछड़ रहे जिलों में समय-समय पर विशेष लोन शिविरों (कैंप) का आयोजन किया जाए, ताकि बैंकिंग सुविधाएं और स्वरोजगार के लिए जरूरी पूंजी सीधे पात्र लाभार्थियों तक आसानी से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग और बैंक आपसी समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित करें कि आमजन को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में रत्ती भर भी कठिनाई न हो। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास में बैंकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि एमएसएमई और होमस्टे सेक्टर में बैंकों के सहयोग से उत्तराखंड में बेहतरीन काम हुआ है। हालांकि, अब सुदूर क्षेत्रों में रोजगार सृजन की रफ्तार को और बढ़ाना होगा। उन्होंने बैंकरों से कहा, "हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि राज्य की मातृशक्ति (महिलाएं) आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर आगे आएं और युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलें।" सीएम ने बैंकों को निर्देश दिया कि महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता पर रखकर काम किया जाए, ताकि स्टार्टअप और स्वरोजगार की योजनाओं को नई उड़ान मिल सके। साथ ही, सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ सीधे और समय पर लाभार्थियों को मिलना चाहिए ताकि सबको आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। इस उच्च स्तरीय बैठक में वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भी एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया गया। बैठक में मौजूद मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देशव्यापी साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के साथ अब भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों को भी सीधे जोड़ा जाए। इस कदम से साइबर ठगी का शिकार हुए पीड़ितों के मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी और ठगी गई रकम को बैंकों के स्तर पर तुरंत फ्रीज करना आसान होगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैंकिंग प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए एक नया निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि मुख्य राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बड़ी बैठक से पहले उप समितियों (सब-कमेटी) की नियमित बैठकें आयोजित की जानी चाहिए। इससे विभिन्न जटिल विषयों, लोन पेंडेंसी और नीतिगत समस्याओं पर जमीनी स्तर पर विस्तृत समीक्षा हो सकेगी, जिससे आम जनता और उद्यमियों से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध व त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।