अरविंद पांडेय 'लेटर विवाद' का क्लाइमेक्स: विधायक के खंडन से कांग्रेस के आरोपों की हवा निकली

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सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से वायरल हो रहे एक कथित पत्र ने उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक अरविंद पांडेय के लिए मुसीबत का सबब बने इस 'लेटर कांड' पर आखिरकार सोमवार को विधायक ने चुप्पी तोड़ी। पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अरविंद पांडेय ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर जो पत्र उनके नाम से वायरल किया जा रहा है, वह पूरी तरह फर्जी और निराधार है।

सूत्रों के मुताबिक, इस वायरल पत्र को लेकर भाजपा संगठन के भीतर भी बेचैनी थी। पार्टी की छवि पर पड़ते असर को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्वयं विधायक अरविंद पांडेय से फोन पर बात की और स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। संगठन चाहता था कि यदि यह पत्र विधायक का नहीं है, तो वह सार्वजनिक रूप से इसका खंडन करें। इसी कड़ी में आज विधायक पांडेय मीडिया के सामने आए और स्पष्टीकरण दिया। इस कथित पत्र को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा और विधायक पांडेय पर तीखे हमले किए थे। कांग्रेस की सक्रियता के कारण यह मामला विधायक के साथ-साथ प्रदेश भाजपा के लिए भी गले की फांस बन गया था। कांग्रेस ने इस पत्र के आधार पर भाजपा की आंतरिक कलह और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, जिससे बैकफुट पर आई भाजपा ने विधायक से त्वरित जवाब मांगा था। पत्रकार वार्ता के दौरान अरविंद पांडेय ने दोटूक कहा, "सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्र मेरा नहीं है। मैंने ऐसा कोई भी पत्र कहीं नहीं लिखा है। यह मेरी और मेरी पार्टी की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है।" उन्होंने इसे विरोधियों की एक ओछी हरकत बताते हुए जनता और कार्यकर्ताओं से भ्रमित न होने की अपील की। विधायक के खंडन के बाद फिलहाल इस विवाद पर विराम लगता दिख रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले इस तरह के 'फर्जी पत्र' का वायरल होना किसी बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है। अब देखना यह होगा कि भाजपा इस मामले में फर्जी पत्र वायरल करने वालों के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाती है।